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अखण्ड सौभाग्य, सुखी दाम्पत्य और शिव-पार्वती के आशीर्वाद की कामना… जानिए 14 सितम्बर की हरितालिका तीज का महत्व।

14 सितम्बर, अखंड सौभाग्य का प्रतीक है हरितालिका तीज

भादौ शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को गौरी शंकर का विशेष पूजन, अर्चन विधि विधान से किया जाता है ऐसा शास्त्र सम्मत है। इस व्रत को कुमारी तथा सौभाग्यवती स्त्रियां ही करती हैं लेकिन धर्मशास्त्रों के आधार पर कहा जा सकता है कि विधवा तथा सधवा स्त्रियां भी इस व्रत को कर सकती हैं। इस व्रत को करने का सभी का उद्देश्य एक मात्र यह है कि शिव-पार्वती की तरह ही उनका अखंड सौभाग्य कई जन्मों तक बना रहे, सुख पूर्वक पार्वती जी की तरह ही शिवलोक को गमन (प्रस्थान) करें, ऐसी शास्त्रों मे मान्यता भी है।
अखण्ड सौभाग्य का प्रतीक यह व्रत बिना किसी आहार के अर्थात् निराहार रहा जाता है। सायंकाल मे स्नान करके, साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर पार्वती तथा शिव जी की मिट्टी की मूर्ति बनाकर पूजन की सम्पूर्ण सामग्री के साथ पूर्ण मनोयोग के साथ पूजा करनी चाहिये। सायंकाल स्नान करके विशेष पूजा के पश्चात् व्रत खोला जाता है।
अखण्ड सौभाग्य का व्रत होने के कारण सुहाग से जुड़ी समस्त वस्तुओं को श्रद्धा भाव से पार्वती जी को समर्पित की जाती है। भोले शंकर को धोती तथा अंगौछा चड़ाया जाता है। यह सुहाग सामग्री किसी ब्राम्हणी तथा धोती और अंगौछा किसी ब्राम्हण को दिया जाता है ऐसा शास्त्र सम्मत है। तेरह प्रकार के व्यन्जन बनाकर रुपये के साथ सास को देकर उनका चरण स्पर्श करके आशीर्वाद लेना चाहिये। शिव-पार्वती का पूजन, भजन, अराधना करके कथा सुननी चाहिये। ताकि आपका मन शिव-पार्वती के ही समीप रहे।

क्या है विशेषः- 14 सितम्बर दिन सोमवार को तृतीया तिथि प्रातः 07 बजकर
14 मिनट तक है उपरान्त चतुर्थी तिथि प्रारम्भ हो जायेगी। चित्रा नक्षत्र भी दिन मे 3 बजकर 16 मिनट तक है, उपरान्त शुभ नक्षत्र स्वाती प्रारम्भ हो जायेगा। सूर्य स्वग्रही सिंह राशि मे हैं, चन्द्रमा शुभ राशि तुला मे है। राहुकाल दिन मे 12 बजे से 01 बजकर 30 मिनट तक है भद्रा भी पाताल मे रात्रि मे 07 बजकर 34 मिनट से प्रारम्भ है। भ्रदा पाताल मे है अतः यह महत्वहीन हो जाते हैं। प्रातः काल की पूजा शुभ लग्न तुला जो प्रातः 08 बजकर 12 मिनट से प्रारम्भ होकर दिन मे 10 बजकर 28 मिनट तक है, यह प्रातः पूजा का मुहुर्त है। सायं कालीन पूजा दोपहर मे 02 बजकर 51 मिनट से 04 बजकर 36 मिनट के मध्य कर सकते हैं। आज ही के दिन गौरी तृतीया उड़ीसा, वृहद गौरी तृतीया व्रतम्, चन्द्रोदय व्यापिनी डेहलिया चतुर्थी का व्रत भी है। गणेश उत्सव की प्रारम्भ भी आज से ही है।
सौभाग्यवती स्त्रियां क्या अवश्य करें:-

  1. सुहाग सामग्री अपनी स्थिति के अनुसार किसी ब्राम्हणी स्त्री को पार्वती जी के निमित्त श्रद्धा के साथ उपहार के रुप मे दान करें।
  2. निराहार व्रत रहने की दशा मे पार्वती जी का हर समय ध्यान लगाये रखें, आशीर्वाद मिलेगा।
  3. किसी भी तरह के धर्म संकट मे न रहें पूरी धार्मिक आस्था मे व्रत करें।
  4. पूजन के पश्चात् ब्राम्हणों को मधुर भोजन कराके ही व्रत समाप्त करें।

भगवान भोलेनाथ को प्रसाद के रुप मे भांग अवश्य चड़ायें।
6. छोटी-छोटी कन्याओं को कुछ ना कुछ अवश्य खिलायें।
7. यदि सम्भव हो तो हिजड़ों को भी सुहाग सामग्री दान करें एवं रुपया-पैसा, उपहार आदि देना भी उत्तम रहेगा।
8.
अपने पूजन मे गणेश जी को अवश्य शामिल करें ऐसा शास्त्र सम्मत है।

Pt Anand Awasthi

पटेल नगर कालोनी बछरावां,
रायबरेली डी-79, साउथ सिटी, लखनऊ

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