पराक्रम के प्रतीक हैं मंगल
पराक्रम से जुड़े हुये कामकाज की व्याख्या यदि करनी हो तो मंगल ज्योतिष जगत मे स्वयं चर्चा मे आ जाते हैं। मंगल हिंसक स्वभाव वाले, युवा, गौर वर्ण, पित्त प्रधान…
पराक्रम से जुड़े हुये कामकाज की व्याख्या यदि करनी हो तो मंगल ज्योतिष जगत मे स्वयं चर्चा मे आ जाते हैं। मंगल हिंसक स्वभाव वाले, युवा, गौर वर्ण, पित्त प्रधान…
नक्षत्र मण्डल मे चन्द्रमा को रानी का उपाधि प्राप्त है। चन्द्रमा स्त्री ग्रह होने के कारण सूर्य का अर्धागिनी भी कहा जाता है। रात्रि मे चन्द्रमा सूर्य से प्राप्त तेज…
समस्त ग्रहों मे सूर्य जी को राजा की उपाधि प्राप्त है जिस कुण्डली मे सूर्य उत्तम होता है वह व्यक्ति राजा एवं विशिष्ट पद पर विराजमार होता है। सूर्य शहद…
रुप, काम कला, सौन्दर्य की अनुभूति कराने वाला ग्रह शुक्र है यह सुन्दर,विशाल नेत्रों वाला, जल तत्व प्रधान, वातकफ पित्त प्रकृति वाला, दखिण पूर्व दिशा का स्वामी, श्वेत वर्ण, युवा…
शनि को काल पुरुष मे पीड़ा और दुख का प्रतीक माना जाता है आकाष मन्डल मे शनि जी सबसे सुन्दर ग्रह है यह खुश होने पर राजा तथा नाखुश होने…
नवग्रह समूह मे बुध जी को युवराज कहा जाता है यह रजोगुणी, पृथ्वी तत्वप्रधान, शूद्र वर्ण, त्रिधातु प्रकृति वाले, नपुंसक, उत्तर दिशा के स्वामी हरित वर्ण, चर प्रकृति, मिश्रिम रस…
देव गुरु बृहस्पति जी को नीति और धर्म तथा विद्या का महान गुरु माना जाता है यह सत्वगुण प्रधान, दीर्घ और स्थूल शरीर वाले, कफ प्रकृति, पीला वर्ण, गोल आकृति,…
छाया ग्रह माना जाने वाला केतु ग्रह ग्रह समूह मे अपनी स्वतन्त्र सत्ता नही रखता है जिस तरह के ग्रह के साथ युती अथवा दृष्टि होगी उसी तरह का फल…
ज्योतिष जगत में राहुग्रह को छाया ग्रह माना गया है यह अनायास फल देने का माहिर खिलाडी है शुभ तथा अशुभ दोनो प्रकार के फल तीव्र गति के साथ करता…