नक्षत्र मण्डल मे चन्द्रमा को रानी का उपाधि प्राप्त है। चन्द्रमा स्त्री ग्रह होने के कारण सूर्य का अर्धागिनी भी कहा जाता है। रात्रि मे चन्द्रमा सूर्य से प्राप्त तेज और गर्म किरणों को शीतलता मे बदलकर पूरे विश्व को शीतलता प्रदान करता है। चन्द्र को कला पुरुष का मन कहा जाता है। चन्द्रमा वायु कफ प्रकृति वाला, बुद्धिमान गोल शरीर, सुन्दर नेत्र, प्रिय बोलने वाला चंचल प्रवृत्ति का भी है।
चन्द्रमा पृथ्वी का ऐसा भाग है जो कालान्तर मे अपनी गुरुत्वाकर्षण शक्ति को त्यागकर पृथ्वी से निकट है यह पृथ्वी से 238 हजार मील दूरी पर स्थिति है यह कहा जा सकता है कि यह तीव्रगामी ग्रह है यह 2180 मील प्रतिघण्टे की गति से चलकर लगभग 27 दिनो मे सौर मण्डल की परिक्रमा करता है।
चन्द्रमा से मुख्यतः स्त्री, मछली, जलीय जीव, शरद ऋतु, यश, मुख् की कान्ति, सफेद रंग, स्फटिक, मुलायम कपड़ा, मोती, छय रोग, कफ, मिरगी, मां का दूध, प्लीहा आदि का विचार चन्द्रमा से किया जाता है।
सूर्य और बुध इस के मित्र ग्रह हैं। चन्द्रमा किसी भी ग्रह को अपना शत्रु नही मानता है। यह वृष राशि मे उच्च तथा वृश्चिम राशि मे नीच माना जाता है। क्या करता है अशुभ चन्द्रः- जलीय योग, भय, स्त्री समागम सम्बन्धी रोग, पीलिया, अतिसार, चेचक एवं नेत्र रोग का अशुभ चन्द्र जन्मदाता बनता है। चन्द्रमा अपनी स्वराशि कर्क मे बेहद ताकतवर स्थिति मे होता है। स्वराशि मे होने पर सुन्दर, तेजस्वी, भाग्यशाली तथा धनवान बनाता है। विलासी स्वभाव होने के कारण रात्रि मे विशेष प्रभाव रखता है।
चन्द्र शन्ति के प्रमुख उपायः-
1. सोमवार के दिन चांदी की अंगूठी मे मोती धारण करना अच्छा माना जाता है। 2. ॐ सोम सोमाय नमः मन्त्र का प्रतिदिन जप करें। 3. सेमवार का व्रत तथा शिव जी पूजन भी लाभदायक होता है। 4. व्रत मे सात्विक तथा शाकाहारी चीजें ही ग्रहण करें। 5. दान का भी विशेष महत्व है जो आपकी श्रद्धा तथा उपलब्ध धन पर आधारित है। दान की वस्तुयें निम्न हैं। चावल, मोती, श्वेत वस्त्र, चांदी, शक्कर, मिश्री, शंख, सीपी, शुद्ध देशी घी, दही कपूर, श्वेत गाय, श्वेत कमल आदि। यदि सम्भव हो तो 11 सोमवार नियमित रुप से 09 कन्याओं को खीर का प्रसाद दें चन्द्र देव आर्शीवाद प्राप्त होता रहेगा।
