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राज्य कार्य के प्रतीक हैं सूर्य

समस्त ग्रहों मे सूर्य जी को राजा की उपाधि प्राप्त है जिस कुण्डली मे सूर्य उत्तम होता है वह व्यक्ति राजा एवं विशिष्ट पद पर विराजमार होता है। सूर्य शहद के समान, पीले नेत्र वाला, चौकोर शरीर, पित्त प्रकृति, स्वच्द कान्ति वाला पुरुष ग्रह माना जाता है। सौर मण्डल का सूर्य प्रमुख ग्रह होने के कारण अन्य सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा करते हैं। धर्म शास्त्रों के आधार पर कहा जाता है कि पृथ्वी तथा स्वर्ग के मध्य जिस स्थान पर ब्रम्हान्ड का केन्द्र है वही सूर्य जी विराजमान है।
सूर्य के माध्यम से ही अन्तरिक्ष, आकाश, दिशा, भूलोक, स्वर्ग, नर्क आदि एक दूसरे से विभाजित होते हैं। सूर्य अपने मार्ग पर चलते हुये अपनी गति से दिन और रात को छोटा, बड़ा करते हैं।

सूर्य पृथ्वी से लगभग सवा करोड़ मील दूरी पर स्थित हैं। यह पृथ्वी से लगभग 13 लाख गुना बड़ा है और सौर मण्डल मे मुख्यतः जितने भी ग्रह हैं वह सभी सूर्य से ही प्रकाश प्राप्त करते हैं। सूर्य सदैव भ्रमणशील रहता है तथा कभी भी अस्त नही होता है। भारतीय ज्योतिष मे सूर्य को काल पुरुष की आत्मा कहा जाता है।
सूर्य के पिता का विचार होता है पराक्रम, अस्थि, आत्मा, पवित्रता, रुचि, ज्ञान, क्षत्रियों के कर्म का विचार सूर्य से किया जाता है। यह मेष राशि मे उच्च तुला राशि मे नीच तथा सिंह राशि मूल त्रिकोण मे होता है।
क्या करता है अशुभ सूर्यः-
सूर्य के अशुभ होने पर पित्त सम्बन्धी रोग, शरीर मे अत्याधिक गर्मी, बार-बार हड्डी का टूटना, अस्थि रोग, छय रोग, नेत्र रोग, राज्य भय इत्यादि का जन्मदाता बनता है।

सूर्य शन्ति के प्रमुख उपायः-
1. रविवार के दिन माणिक्य धारण करना उत्तम होता है।
2. गेहूँ तथा गुड़ गाय को खिलाना बेहतर माना गया है।
3. सवा किलो से ग्यारह किलो गेहूँ, ताँबे का लोटा, दीपक, केशर, खस, मैनसिल, शुद्ध देशी घी, सोना, सवा मीटर लाल वस्त्र, लाल बैल, वर्ण दक्षिणा रविवार के दिन दान कर सकते हैं। ॐ सूर्याय नमः मन्त्र का प्रतिदिन जप करके अशुभ सूर्य का प्रभाव कम कर सकते हैं।
4. ॐ अरुणाय नमः मन्त्र का जप भी प्रतिदिन कर सकते हैं लाभ मिलेगा।

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