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रक्षा संकल्प का प्रतीक है रक्षाबन्धन | महत्व, परंपरा और शुभ भाव

िन्दू जन मानस में रक्षा बन्धन ऐसा त्यौहार है जो परिवार, समाज, भाई, बहन आदि को स्नेह की डोरी से बांधकर रखता है। अटूट प्रेम तथा असीमित प्यार को अभिसिंचित करता है। रक्षाबन्धन का शाब्दिक अर्थ है कि अपनी रक्षा के लिये किसी को बांध लेना इसीलिये इस त्यौहार को प्रेम, उल्लास के साथ मनाते हैं। भाई तथा बहन के मध्य एक तरह का संकल्प भाई द्वारा लिया जाता है कि हे बहन मैं आजीवन तेरी रक्षा करूँगा, तू मेरी शरण में है।

मुख्यतः यह त्यौहार श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को धूम-धाम से पूर्ण मनोयोग से मनाते हैं। इस वर्ष यह त्यौहार 28 अगस्त, शुक्रवार, पूर्णिमा तिथि को पारस्परिक सौहार्द के साथ मनाया जायेगा। धर्म शास्त्रों में कहा गया है कि रक्षा बन्धन स्नेह का अमूल्य बंधन है जिसको ना तो धन से और न ही सर्वस्व देकर चुकाया जा सकता है।

धार्मिक दृष्टिकोण से देखें तो द्रोपदी भगवान कृष्ण को अपना भाई मानती थीं। एक बार भगवान श्रीकृष्ण के हाथ चोट लगने पर द्रोपदी ने अपनी धोती का किनारा फाड़कर कृष्ण जी को बांधा था। इसी कर्ज को चुकाने के लिये जब द्रोपदी का चीर हरण हो रहा था तब श्रीकृष्ण जी ने द्रोपदी को लाज बचाई।

चित्तौड़ की रानी कर्मावती ने हुमायूँ को अपना भाई मानकर उसके पास राखी भेजी थी। हुमायूँ ने राखी स्वीकार करके गुजरात के बादशाह बहादुर शाह जफर से युद्ध भी किया था। यह प्रसंग राखी के धार्मिक महत्व को प्रदर्शित करता है।

क्या करते हैं त्यौहार में:-

आज के दिन बहनें स्नान करके अपने घर की दीवारों पर सोना करती हैं, उपरान्त सेवइयां, चावल की खीर और मिठाई से इनकी पूजा करती हैं। सोनो के ऊपर खीर, मिठाई की मददसे राखी बांधी जाती है। नागपंचमी के दिन गेहूँ बोने का भी प्राविधान है। उगने वाले गेहूँ के पौधों को पूजा में रखा जाता है। भाइयों के राखी बांधने के पश्चात् गेहूँ के पौधों को कानों पर रख देते हैं। श्रावण पूर्णिमा को प्रातः काल ही रक्षा का प्राविधान किया जाता है।

येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वाम् निबध्नामि रक्षे माचल माचल॥

इसी मन्त्र के उच्चारण के साथ देव गुरु बृहस्पति जी श्रावणी के दिन ही रक्षा का विधान किया था ऐसा शास्त्र सम्मत है।

रक्षाबन्धन के त्यौहार में क्या है आवश्यक:-

श्रावणी पूर्णिमा तिथि, शुक्रवार, 28 अगस्त को जन मानस का लोक प्रिय त्यौहार रक्षाबन्धन है वैसे तो सम्पूर्ण दिवस ही रक्षा बन्धन का शुभ मुहूर्त है किन्तु अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 17 मिनट से प्रारम्भ होकर 12 बजकर 05 मिनट तक है। तुला लग्न के राशीश शुक्र जी हैं। तुला लग्न का भोग काल दिन में 11 बजकर 35 मिनट तक है। 11 बजकर 17 मिनट से 11 बजकर 35 मिनट का समय रक्षा बन्धन के लिये अति उत्तम है।

भाइयों को क्या करना है आवश्यक:-

1.⁠ ⁠अपनी बहन की रक्षा का संकल्प लेना चाहिये।
2.⁠ ⁠श्रद्धा तथा धन की उपलब्धता के अनुसार, बहन को दान अवश्य करें।
3.⁠ ⁠जहाँ तक हो सके अपनी बहनों का सम्मान अवश्य करें।
4.⁠ ⁠हार्दिक प्रेम और भावना से भरे इस त्यौहार पर किसी से भी मन मुटाव न रखें।
5.⁠ ⁠श्रावणी के दिन देव गुरु बृहस्पति जी का पूजन अवश्य करें।

Pt Anand Awasthi

पटेल नगर कालोनी बछरावां,
रायबरेली डी-79, साउथ सिटी, लखनऊ

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