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कृष्ण जन्मोत्सव की प्रतीक है जन्माष्टमी | 04 सितम्बर विशेष

कृष्ण जन्मोत्सव की प्रतीक जन्माष्टमी 04 सितम्बर विशेष

भगवान विष्णु का अवतार भगवान श्रीकृष्ण के रुप मे तब हुआ जब कंस के अत्याचारों से पृथ्वी भी भार सहन करने की स्थिति मे नही थी पृथ्वी गाय के रुप मे ब्रम्हाजी के पास गयी ब्रम्हा जी समस्त देवताओं को साथ लेकर पृथ्वी सहित विष्णु जी के पास क्षीर सागर गये, उस समय भगवान विष्णु शयन कर रहे थे काफी प्रार्थना के उपरान्त भगवान विष्णु की निद्रा भंग हुयी। भगवान ने पृथ्वी सहित सभी देवताओं से उनके आने का कारण पूछा जब पृथ्वी ने बताया कि प्रभु मेरे ऊपर बहुत अत्याचार हो रहे हैं मै पाप के बोझ से बहुत ज्यादा दबती जा रही हूँ प्रभू मेरा उद्धार करो।
ऐसा सुनकर भगवान विष्णु बोले कि मैं ब्रज मण्डल मे वासुदेव गोप की पत्नी देवकी के गर्भ से जन्म लूँगा। आप समस्त देवतागण ब्रज मण्डल मे जाकर यादव वंश मे अपना शरीर धारण करें। इतना कहकर भगवान विष्णु अंतरध्यान हो गये। यहीं से श्रीकृष्ण जी के जन्म द्वापर युग मे जन्म की रुपरेखा निर्धारित होती है। पापों का अन्त, पृथ्वी का उद्धार, प्रेम रस स्थापित करने का श्रेय भी भगवान कृष्ण को दिया जाता है।

भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष की अष्टमी कृष्णावतार अष्टमी, श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्यौहार धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह हिन्दू जनमानस का हमारे देश का प्रमुख त्यौहार है। शास्त्रों मे कहा जाता है कि कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मथुरा नगरी मे असुर राजा कंस के कारागार मे देवकी की आठवी संतान के रुप मे कृष्ण जी का जन्म हुआ। इस दिन अष्टमी तिथि तथा रोहिणी नक्षत्र का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।

क्या है विशेषः-

इस बार जन्माष्टमी मे भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी तिथि अर्धरात्रि तक तथा रोहिणी नक्षत्र भी अर्धरात्रि तक है। हर्षण योग, बाल करण तथा चन्द्रमा भी वृष राशि के अन्तरगत हैं तथा चन्द्रोदय भी रात्रि मे 11 बजकर 09 मिनट पर है। उदय कालिक अष्टमी तिथि एवं आज ही प्राप्त हो रहा है, इसी जयन्ती को योग का रुप भी माना गया है। यह अत्यन्त सुखद संयोग है कि जयन्ती योग भी कृष्ण जन्माष्टमी को इस वर्ष है। इस दिन कृष्ण जन्म दिवस के अवसर पर मंदिरों मे तथा जगह-जगह झांकिया सजाई जाती है। श्रीकृष्ण जी के मंदिरों मे विशेष सजावट का वातावरण बनाया जाता है। सभी व्रती 12 बजे रात्रि तक व्रत रखकर भगवान का प्रसाद ग्रहण करते हैं। दूसरे दिन प्रातः काल ही नन्द महोत्सव भी मनाया जाता है। धर्म शास्त्रों में कहा जाता है कि जन्माष्टमी के दिन व्रत रखने से मनुष्य सात जन्मों के पापों से मुक्त हो जाता है।

क्या है अति आवश्यकः-

  1. रात्रि मे 12 बजे के उपरान्त व्रत खोलें फलाहार लें।
  2. इस व्रत मे अनाज का प्रयोग बिलकुल नही करना चाहिये।
  3. उपवास वाले दिन सभी देवताओं को प्रातः ही प्रणाम करके पूर्व मुख या उत्तर मुख की ओर बैठकर पूजन करें।
  4. व्रत से 01 दिन पूर्व सप्तमी सात्विक तथा हल्का भोजन करें उत्तम होगा।
  5. रात्रि मे स्त्री संग से दूरी बनाये रखें मन और इन्द्रियों को अपने वश में रखें।
  6. पाप, व्यभिचार आदि से दूरी बनाना भी बेहतर होगा।
  7. अच्छी तरह से इस व्रत का पालन करने से मनुष्य सभी संकटों, पापों आदि से मुक्त हो जाता है, ऐसा शास्त्र सम्मत है।

Pt Anand Awasthi

पटेल नगर कालोनी बछरावां,
रायबरेली डी-79, साउथ सिटी, लखनऊ

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